परिचय: हमारे जीवन के अनलिखे पन्ने
हम में से कई लोग अपने विचारों और यादों को सहेजना चाहते हैं, लेकिन अक्सर यह समझ नहीं पाते कि शुरुआत कहाँ से करें। डायरी लिखने का ख्याल तो आता है, पर एक हिचकिचाहट हमें रोक लेती है। हम मानते हैं कि डायरी लिखना एक खास कला है, जिसके कुछ नियम होंगे। लेकिन क्या हो अगर डायरी लिखने की असली कला हमारी सोच से बिलकुल अलग हो? यह लेख डायरी के बारे में कुछ ऐसी ही चौंकाने वाली और आज़ाद करने वाली सच्चाइयों को उजागर करेगा जो शायद आपके लिखने का नज़रिया ही बदल दें।
1. आपकी सबसे निजी बातें, इतिहास का सबसे बड़ा दस्तावेज़ बन सकती हैं
यह एक अजीब विरोधाभास है कि डायरी, जो मूल रूप से खुद के लिए लिखी जाती है, कभी-कभी पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रिकॉर्ड बन जाती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ऐनी फ्रैंक की डायरी। यह एक किशोरी द्वारा 1942-44 के बीच नात्सी अत्याचारों से छिपकर रहते हुए लिखी गई थी। बाद में यह बीसवीं सदी की सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक बन गई।
आज इस डायरी को न केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के रूप में, बल्कि एक साहित्यिक कृति के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति के निजी अनुभव, इतिहास के एक भयावह दौर की सबसे शक्तिशाली आवाज़ बन सकते हैं। जैसा कि इल्या इहरनबर्ग ने कहा है:
"यह साठ लाख लोगों की तरफ़ से बोलने वाली एक आवाज़ है—एक ऐसी आवाज़, जो किसी संत या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की की है।"
2. डायरी असल में कोई साहित्यिक विधा नहीं है
यह सुनना शायद अटपटा लगे, लेकिन डायरी उस तरह से कोई साहित्यिक विधा नहीं है, जैसे कहानी, उपन्यास, कविता या नाटक होते हैं। हाँ, कोई कहानी या उपन्यास डायरी की शैली में लिखा जा सकता है, लेकिन वहाँ डायरी का सिर्फ 'रूप' उधार लिया जाता है।
एक सच्ची डायरी का उद्देश्य पाठकों के लिए साहित्य रचना नहीं है। यह नितांत निजी स्तर पर घटी घटनाओं और उनसे जुड़ी बौद्धिक-भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का लेखा-जोखा है। इसे हम किसी और के लिए नहीं, बल्कि स्वयं अपने लिए शब्दबद्ध करते हैं। यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लेखक को 'साहित्य' बनाने के दबाव से मुक्त करता है और उसे सिर्फ अपनी सच्ची भावनाओं को व्यक्त करने पर ध्यान केंद्रित करने की आज़ादी देता है।
3. सबसे अच्छी डायरी शायद एक पुरानी, इस्तेमाल की हुई नोटबुक है
इसी आज़ादी को और बढ़ाने का एक बहुत ही व्यावहारिक तरीका भी है। डायरी लिखने के लिए सबसे अच्छी सलाहों में से एक यह है कि पहले से छपी हुई तारीखों वाली नई डायरी का इस्तेमाल न करें। वे अक्सर सीमित जगह के कारण बंधन महसूस करा सकती हैं। इसके बजाय, एक सादी नोटबुक या किसी पुराने साल की डायरी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
ऐसा क्यों? क्योंकि हमारे सभी दिन एक समान नहीं होते। किसी दिन आप शायद सिर्फ दो-तीन पंक्तियाँ ही लिखना चाहें, और किसी दिन आपकी बात पाँच पन्नों में पूरी हो। एक पुरानी डायरी या नोटबुक आपको यह आज़ादी देती है। आप अपनी सुविधा के अनुसार तारीख डाल सकते हैं और जितनी चाहे उतनी जगह का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह तरीका जीवन और विचारों के स्वाभाविक, असमान प्रवाह के अनुकूल है।
4. अच्छा लिखने के लिए, 'बुरा' लिखिए
जब आप लिखने की जगह के बंधन से आज़ाद हो जाते हैं, तो अगला कदम है शब्दों के बंधन से मुक्त होना। यह विचार सचमुच आज़ाद महसूस कराता है कि डायरी को परिष्कृत और मानक भाषा में लिखना कतई ज़रूरी नहीं है। "सही" लिखने का दबाव अक्सर हमें ईमानदारी से समझौता करने पर मजबूर कर सकता है। हम शब्दों को सुंदर बनाने के चक्कर में वह नहीं लिख पाते जो हम वास्तव में महसूस करते हैं।
डायरी का असली गुण उसकी स्वाभाविक और अनफ़िल्टर्ड शैली में ही है। आपके अंदर के स्वाभाविक वेग से जो शैली अपने आप बनती है, वही डायरी के लिए सबसे उचित शैली है। यहाँ भाषाई शुद्धता या शैली के सौंदर्य की चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। यह प्रामाणिकता के बारे में है, प्रदर्शन के बारे में नहीं।
5. आप अनजाने में अपने दौर का इतिहास लिख रहे हैं
और जब आप इस तरह पूरी ईमानदारी से अपने मन की बातें लिखते हैं, तो आप अनजाने में एक और महत्वपूर्ण काम कर रहे होते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि आपकी डायरी सिर्फ आपकी निजी घटनाओं और भावनाओं का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि "आपके मन के आईने में आपके दौर का अक्स" भी है। आप अपने जिन अनुभवों को दर्ज करते हैं, उनमें आपकी नज़र से देखा और परखा गया समकालीन इतिहास किसी-न-किसी मात्रा में मौजूद रहता है।
जब आप यह महसूस करते हैं कि आपके निजी लेखन में आपके समय का एक छोटा सा हिस्सा दर्ज हो रहा है, तो डायरी लिखने के इस व्यक्तिगत कार्य को एक गहरा अर्थ और महत्व मिल जाता है।
निष्कर्ष: खुद से एक संवाद
संक्षेप में, डायरी लिखना अंततः "अपने ही साथ स्थापित होनेवाला संवाद" है। यह नियमों और दूसरों के jugement से मुक्त होकर खुद से दोस्ती करने का एक बेहतरीन तरीका है। यह एक ऐसा अभ्यास है जो आपको खुद को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।
तो, क्या आप आज खुद से बात करने के लिए कुछ पल निकालने को तैयार हैं?
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