मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

अलंकार

 



"अलंकरोति इति अलंकार:।"

अथवा

"अलंक्रियतेsनेन इति अलंकार:।"


अर्थात जो अलंकृत करे, शोभा बढ़ाए, उसे अलंकार कहा जाता है।

जिस तत्व से काव्य की शोभा होती है, उसे अलंकार कहते हैं।

संस्कृत काव्यशास्त्र में अलंकार सिद्धांत का प्रवर्तक भामह को माना जाता है। इसी परंपरा में दंडी और उद्भट भी आते हैं।


अलंकार तीन प्रकार के होते हैं-

क) शब्दालंकार 

ख) अर्थालंकार 

ग) उभयालंकार


शब्दालंकार


जब शब्दों के विशेष प्रयोग के द्वारा काव्य में चमत्कार उत्पन्न किया जाए अथवा काव्य की शोभा बढ़ाई जाए, वहां शब्दालंकार का प्रयोग होता है।


(१) अनुप्रास अलंकार


एक या एक से अधिक वर्णों की क्रमानुसार आवृत्ति को अनुप्रास अलंकार कहा जाता है।


चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल-थल में।


मुदित महीपति मंदिर आए, सेवक सचिव सुमंत बुलाए।


शेष महेश गणेश दिनेश सुरेश हि जाहि निरंतर गावे।


(२) यमक अलंकार


जहां एक शब्द या शब्द समूह एक से अधिक बार आए किंतु उनका अर्थ हर बार भिन्न हो, वहां यमक अलंकार होता है।


"तीन बेर खाती थी, वो तीन बेर खाती है।"


उपरोक्त उदाहरण के पहले अंश में दिन में तीन बार खाने की बात कही गई है, वहीं दूसरे अंश में मात्र तीन फल खाने की बात कही गई है। अतः यहां यमक अलंकार है।


काली घटा का घमंड घटा।


माला फेरत जुग गया, मिटा न मन का फेर। 

कर का मनका डारि दै, मन का मनका फेर।।


कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। 

या खाए बौराय जग,  वा पाए बौराय।।


(३) श्लेष अलंकार


जहां एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हों, वहां श्लेष अलंकार होता है।


रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।।


यहां पानी तीन अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। मोती के लिए उसकी चमक, मनुष्य के लिए उसका सम्मान तथा चून के लिए जल के रूप में पानी का प्रयोग हुआ है।


जो रहीम गति दीप की कुल कपूत गति सोय।

बारै उजियारो करै, बढे अंधेरो होय।।


सुबरन को ढूंढत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।



अर्थालंकार


जब काव्य में चमत्कार शब्द के द्वारा न होकर अर्थ के द्वारा उत्पन्न होता है, तो वहां अर्थालंकार होता है।


(४) उपमा अलंकार


समान गुण के आधार पर जहां एक वस्तु की तुलना किसी दूसरी वस्तु से की जाती है, वहां उपमा अलंकार होता है।


उपमा के चार अंग होते हैं

उपमेय - जिसकी तुलना की जाती है।

उपमान - जिससे तुलना की जाती है।

साधारण धर्म - जिस गुण के कारण तुलना की जाती है।

वाचक शब्द - जिस शब्द के द्वारा तुलना की जाती है।


"पीपर पात सरिस मन डोला।"

मन - उपमेय 

पीपर पात - उपमान 

डोला - साधारण धर्म 

सरिस - वाचक शब्द


नील गगन-सा शांत हृदय था हो रहा।


कोटि कुलिस सम वचन तुम्हारा।


आरसी-से अंबर में आभा-सी उज्यारी लागै।


(५) रूपक अलंकार


जब उपमेय पर उपमान का आरोप हो जाता है अर्थात उपमेय और उपमान में भेद मिट जाता है, तो वहां रूपक अलंकार होता है।


"एक राम-घनश्याम हित चातक तुलसीदास।"


यहां राम की तुलना घनश्याम से न करते हुए राम को ही घनश्याम कहा गया है, अर्थात राम रूपी घनश्याम। 


चरण-कमल बंदौं हरिराई।


मैया, मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।


बंदौं गुरुपद-पदुम परागा।


(६) उत्प्रेक्षा अलंकार


जहां उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाती है, वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

इसमें जनु, मनु, मानो, जानो जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है।


पाहुन ज्यों आए हों गांव में शहर के।

मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।।


सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। 

मनो नीलमणि सैल पर, आतप पर््यो प्रभात।।


उसका मुख मानो चंद्रमा है।



(७) अतिशयोक्ति अलंकार


जहां किसी बात का वर्णन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर किया जाता है, वहां अतिशयोक्ति अलंकार होता है।


हनुमान की पूंछ में, लग न पाई आग। 

लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।


देख लो साकेत नगरी है यही। 

स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।।


(८) मानवीकरण अलंकार


जहां मानवेत्तर जगत एवं उसके भावों का वर्णन मानव के रूप में किया जाता है, वहां मानवीकरण अलंकार होता है।


मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।


दिवसावसान का समय, 

मेघमय आसमान से उतर रही है, 

वह संध्या सुंदरी परी-सी, धीरे-धीरे-धीरे।


बीती विभावरी जाग री। 

अंबर-पनघट में डुबो रही, तारा-घट उषा नागरी।




शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

समास (Compound)

 




समास का अर्थ है - संक्षेप। 

'यह तीन भुजाओं का समूह है' के स्थान पर 'यह त्रिभुज है' कहना ज्यादा सटीक है।


समास का मुख्य उद्देश्य है- संक्षिप्तिकरण। 


समास के प्रयोग से वाक्य सुगठित, संक्षिप्त तथा अधिक प्रभावकारी बनता है। 

अतः समास संक्षेप करने की एक प्रक्रिया है। 


दो या दो से अधिक शब्दों का परस्पर संबंध बताने वाले शब्दों अथवा विभक्ति-चिन्हों आदि के लोप होने पर उनसे बने एक शब्द को समास कहते हैं।


उदाहरण:


घोड़े पर सवार = घुड़सवार

माता और पिता = माता-पिता


समास-विग्रह : पदों का विस्तृत रूप।

सामासिक पद / समस्त पद : संक्षिप्त रूप।



समास के भेद एवं उनके उदाहरण:


(१) तत्पुरुष समास


वह समास जिसका अंतिम पद प्रधान हो। 

जैसे- यह एक राजमहल है। 

इस वाक्य में समस्त पद राजमहल है, जिसका विग्रह है: राजा का महल। 

इस पद में 'राजा' पहला पद और 'महल' अंतिम पद है। यहां महल की प्रधानता है जो राजा से संबंधित है। 

विभक्ति-चिन्हों के आधार पर तत्पुरुष समास के 6 भेद होते हैं-


कर्म तत्पुरुष 

करदाता - कर को देने वाला


करण तत्पुरुष

भयभीत - भय से भीत


संप्रदान तत्पुरुष 

सत्याग्रह - सत्य के लिए आग्रह


अपादान तत्पुरुष 

गुणहीन - गुणों से हीन


संबंध तत्पुरुष 

राजपुत्र - राजा का पुत्र


अधिकरण तत्पुरुष 

घुड़सवार - घोड़े पर सवार



(२) द्वंद्व समास


जिस समास में दोनों पद प्रधान हो, वह द्वंद्व समास कहलाता है।


फूल-पत्ता : फूल और पत्ता 

दाल-रोटी : दाल और रोटी 

माता-पिता : माता और पिता।



(३) द्विगु समास


जिस समास में पहला पद संख्यावाचक हो, वह द्विगु समास कहलाता है।


त्रिभुज - तीन भुजाओं का समाहार

चौराहा - चार राहों का समाहार

पंचमुखी - पांच मुखों का समाहार


(४) कर्मधारय समास


जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य हो, कर्मधारय समास कहलाता है।


नीलगगन - नीला है जो गगन

पीतांबर - पीला है जो अंबर

कमलनयन - कमल के समान नयन।



(५) अव्ययीभाव समास


जिस समास में पहला पद अव्यय हो, वह अव्ययीभाव समास कहलाता है। यह वाक्य में क्रिया-विशेषण का कार्य करता है।


यथाशक्ति - शक्ति के अनुसार 

प्रतिदिन - प्रत्येक दिन 

आजीवन - जीवन भर 



(६) बहुव्रीहि समास


जिस समास में दोनों पद प्रधान न होकर एक तीसरे अर्थ का बोध होता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।


लंबोदर - लंबा है उदर जिसका वह अर्थात् गणेश

दशानन - दस है आनन जिसके वह अर्थात् रावण

नीलकंठ - नीला है कंठ जिसका वह अर्थात् शिव






गुरुवार, 24 सितंबर 2020

अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

 


लेखन एक रचनात्मक कार्य है। जब हम किसी विषय पर लिखते हैं तो उसमें हमारी रचनात्मकता झलकती है। रचनात्मकता के बहुत से आयाम हैं तथा इसे प्रभावित व निर्धारित करने वाले बहुत से कारक होते हैं। हम चाहे जिस विधा में लेखन करें अथवा हम किसी भी विषय पर लेखन कार्य करें, यदि हममें रचनात्मकता है तभी हम बेहतर लेखन कर पाने में सक्षम होंगे। किसी अप्रत्याशित विषय पर लेखन कार्य करना तो और भी चुनौती भरा काम होता है।


आजकल परीक्षाओं में भी निबंध लेखन जैसे पारंपरिक प्रश्नों की जगह अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का प्रचलन आरंभ हो गया है। कुछ समय पहले तक विद्यार्थी परीक्षाओं में किसी निर्धारित विषय पर निबंध लिख रहे होते थे तथा निबंध के संभावित विषय भी अनुमान कर लिया करते थे तथा इसी अनुमान आधारित विषयों पर निबंध लेखन की तैयारी करके परीक्षाओं में अपना प्रदर्शन किया करते थे।


अप्रत्याशित विषयों पर लेखन एक चुनौती भरा काम विद्यार्थियों के सामने रहता है। इसमें पूछे गए प्रश्नों अथवा विषयों का पूर्वानुमान लगाना भी लगभग मुश्किल होता है। अतः ऐसे प्रश्नों के उत्तर बेहतर ढंग से तभी लिखे जा सकते हैं जब आपमें रचनात्मक क्षमता का विकास हो तथा आप किसी भी विषय पर तत्काल विचार करके बेहतर लेखन कर सकने में सक्षम हों। 


अब हमारे सामने सवाल यह है कि रचनात्मक क्षमता का विकास कैसे किया जाए, जिससे ऐसे प्रश्नों के उत्तर बेहतर ढंग से लिखा जा सके।


रचनात्मक क्षमता विकसित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन है- अधिक से अधिक पढ़ने की आदत का विकास करना। 


विभिन्न विषयों के बारे में अध्ययन आपकी विचार क्षमता को समृद्ध बनाता है। आप बहुत तरह से चीजों को देख पाते हैं, उसे अनुभव कर पाते हैं तथा उसके बारे में सोच पाते हैं। अध्ययन से आपका शब्द-भंडार भी बढ़ता है तथा आप अपनी अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करते चलते हैं।


आजकल परीक्षाओं में रटे-रटाए विषयों पर लिखने की मांग नहीं होती है। विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह नए विषयों के बारे में सोचने में सक्षम हों, उनके अपने शब्द-भंडार हों, उनमें रचनात्मकता हो तथा वे अपनी बातों को अपने तरीके से व्यक्त कर सकने में समर्थ हों।


आज भाषा में सबसे ज़रूरी बात, जो एक विद्यार्थी से अपेक्षा की जाती है, वह है भाषा व विचारों की मौलिकता, रचनात्मकता तथा अभिव्यक्ति क्षमता।


अलग-अलग विषयों पर निरंतर अध्ययन के क्रम में दो बातों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए- विचार व भाषा।


विचारों की विविधता आपमें जितनी अधिक होगी, नए और भिन्न विषयों पर लेखन-कार्य आपके लिए उतना ही सुगम हो जाएगा।


भाषा सीखने के क्रम में अपना शब्द-भंडार अधिक से अधिक बढ़ाने का प्रयास कीजिए। शब्दों के यथोचित प्रयोग पर ध्यान देने से आपकी अभिव्यक्ति क्षमता का विकास होता है। लेखन करते समय आप विभिन्न संदर्भों में उचित शब्दों का प्रयोग कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।


अधिक से अधिक व निरंतर अध्ययन करने, अपनी विचार क्षमता को विकसित करने तथा शब्द-भंडार को बढ़ाते हुए अपनी अभिव्यक्ति को विकसित करने के साथ-साथ लेखन कार्य का अभ्यास करना बहुत आवश्यक है।


आप अच्छा लेखन तभी कर सकते हैं जब लिखने का लगातार अभ्यास करें। केवल पढ़ने मात्र से आपकी लेखन क्षमता का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है। 


कई बार विद्यार्थी विभिन्न विषयों को पढ़ने मात्र से यह सोच लेते हैं कि संबंधित विषय पर वह अच्छा लेखन भी कर सकते हैं। लेकिन साधारणतः ऐसा नहीं हो पाता है। जब लेखन-कार्य का सही समय आता है तो वे उलझ जाते हैं।


अतः आपको प्रतिदिन विभिन्न विषयों पर लिखने की आदत का विकास करना चाहिए। तभी आप किसी भी अप्रत्याशित विषय पर अच्छा लेखन-कार्य कर सकने में सक्षम हो सकेंगे।

अप्रत्याशित लेखन के अभ्यास के लिए यहां कुछ विषय सुझाए जा रहे हैं। ये विषय केवल उदाहरण के लिए हैं। आप इस तरह के तमाम अन्य विषय सोच सकते हैं तथा उस पर लेखन-कार्य का अभ्यास कर सकते हैं। 


अप्रत्याशित विषय- जैसा नाम से ही स्पष्ट है, इसके अंतर्गत विषय असीम हैं। इसमें विधागत सीमा भी नहीं रखी जाती है। कहानी, कविता, डायरी, पत्र, यात्रा, संस्मरण, जीवनी आदि किसी भी विधा में लेखन के लिए कोई भी विषय दिए जा सकते हैं।


महामारी और हम 

आधुनिक जीवन-शैली 

स्वास्थ्य से बड़ा कुछ भी नहीं है

ऑनलाइन शिक्षा

लॉकडाउन के मेरे अनुभव

कोरोना वैक्सीन का इंतजार

हमारे जीवन पर सूचना तकनीक का असर

हमारी आदतें

कोरोना काल के बाद की दुनिया

भीड़ भरी बस का अनुभव

जब मेरी ट्रेन छूट गई

मेरा वह जन्मदिन जो मुझे आज भी याद है

स्कूल में मेरा पहला दिन

मेरा प्रिय भोजन

उस दिन जब मैं बहुत उदास था

मेरी पहली रेल यात्रा

यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता

मेरे सपनों का स्कूल

मेरे जीवन का लक्ष्य

किताबें जो मुझे बहुत प्रिय हैं

मेरी पसंदीदा कहानी 

सिनेमा देखने का मेरा पहला अनुभव

खाना पकाना भी एक कला है

मैं जब बीमार पड़ा

जब मुझे किसी ने डांटा

मैंने जब साइकिल चलाना सीखा

बाढ़ का मेरा अनुभव

उस दिन मूसलाधार बारिश हुई

इंद्रधनुष

गांव और शहर का जीवन

नदियों का महत्त्व


ऐसे तमाम विषय जो हमारे आपके आसपास बिखरे पड़े हैं, उन सभी पर लिखा जा सकता है। ये सभी विषय अप्रत्याशित विषय के रूप में दिए जा सकते हैं, जिस पर लिखने के लिए आपको कहा जा सकता है। अतः अधिक से अधिक विषयों पर सोचें, बारीकी से निरीक्षण करें, अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करें, शब्द-भंडार बढ़ाएं तथा निरंतर लिखने का अभ्यास करते रहें।





रविवार, 13 सितंबर 2020

हिंदी गीत

 हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर विशेष


गीत


भारत की पहचान है, हिंदी हमारी शान है।


राष्ट्र-चेतना सबमें भरती, 

एक सूत्र में सबको पिरोती

आलोकित हो रही दिशाएं

ऐसी जगमग इसकी ज्योति

संस्कृत की इस जाया पर, हम सबको अभिमान है।


भारत में कितनी भाषाएं 

ये हम सबकी हैं आशाएं

भाषा की समृद्ध यह थाती

और कहां जग में हम पाएं

देती शक्ति एकजुट होकर, हिंदी बनी बलवान है।


विश्व भाल पर जगमग करती

ऐसी है स्वर्णिम यह बिंदी 

मानवता का संदेश सुनाती

है जग को  यह अपनी हिंदी 

उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम, इसका ही गुणगान है।


  • -विनोद कुमार पाठक





शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

हिंदी (आधार) कक्षा-11 (अंक- विभाजन)

 हिंदी (आधार) 

विषय कोड - 302 

कक्षा - ग्यारहवीं

प्रश्न-पत्र में अंक विभाजन



खंड - क


1- अपठित गद्यांश से 10 प्रश्न       1 x 10

2- अपठित काव्यांश से 5 प्रश्न.      1 x 5


खंड - ख


(कार्यालय हिंदी और रचनात्मक लेखन)


3- दी गई स्थिति अथवा घटना के आधार पर रचनात्मक लेखन (विकल्प सहित)    5 अंक


4- औपचारिक / अनौपचारिक पत्र-लेखन।  5 अंक


5- व्यवहारिक लेखन :

       (प्रतिवेदन, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, कार्यसूची/कार्यवृत्त)

       दो लघु उत्तरीय प्रश्न     3 + 2 = 5 अंक


6- शब्दकोश से संबंधित पांच बहुविकल्पी प्रश्न।   1 x 5 = 5


7- जनसंचार माध्यम और पत्रकारिता के विविध आयाम 

       (अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर)

       दो लघु उत्तरीय प्रश्न।   3 + 2 = 5


खंड - ग


पाठ्य-पुस्तक (आरोह, भाग- 1)


काव्य खंड


8- किसी एक काव्यांश पर अर्थग्रहण से संबंधित तीन प्रश्न (विकल्प सहित)   2 x 3 = 6 अंक


9- एक काव्यांश के सौंदर्य बोध पर दो प्रश्न (विकल्प सहित) 2 x 2 = 4 अंक


10- कविताओं की विषय वस्तु पर आधारित दो लघु उत्तरीय प्रश्न (विकल्प सहित). 3 + 2 = 5 अंक


गद्य खंड


11- गद्यांश पर आधारित अर्थ ग्रहण संबंधी तीन प्रश्न। 2 x 3 = 6 अंक


12- पाठों की विषय वस्तु पर आधारित चार में से तीन बोधात्मक प्रश्न। 3 x 3 = 9 अंक


वितान, भाग 1


13- पाठों की विषयवस्तु पर आधारित 4 लघु उत्तरीय प्रश्न:

      दो प्रश्न    3 x 2 = 6 अंक

      दो प्रश्न    2 x 2 = 4 अंक



      


आंतरिक मूल्यांकन

20 अंक


1- श्रवण (सुनना) कौशल की जांच -         5 अंक


2- वाचन (बोलना) कौशल की जांच -        5 अंक


3- परियोजना कार्य -                           10 अंक


क) विषय वस्तु              - 5 अंक

ख) भाषा एवं प्रस्तुति      - 3 अंक

ख) शोध एवं मौलिकता।  - 2 अंक



सत्र 2020-21 के लिए निम्नलिखित पाठ पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है-







कक्षा- 12 के लिए यहां देखें-



हिंदी (आधार)/ कक्षा-12/ परीक्षा भार विभाजन

 

विषय कोड-302

कक्षा- 12वीं

परीक्षा भार विभाजन (सत्र 2020-21)



जैसाकि आप सब जानते हैं कि सत्र 2020-21 के लिए सीबीएसई ने प्रश्न-पत्र के प्रारूप में बदलाव किए हैं तथा परीक्षा भार विभाजन में भी परिवर्तन किए गए हैं।

आज हम यहां 12वीं कक्षा के हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम में हुए बदलाव तथा परीक्षा भार विभाजन के संबंध में विस्तार से चर्चा करेंगे।

सत्र 2020-21 में भी लिखित परीक्षा का अंक भार 80 ही रहेगा लेकिन इन अंको का विभाजन प्रश्न-पत्र में इस बार कुछ अलग ढंग से होगा।

हिंदी (आधार) विषय के प्रश्न-पत्र के मुख्य दो भाग होंगे- 

१- खंड अ (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)        40 अंक

२- खंड ब (वर्णनात्मक प्रश्न)      40 अंक



खंड - अ

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

अंक - 40


1- अपठित गद्यांश               1 अंक x 10 प्रश्न 


2- अपठित काव्यांश            1अंक x 5 प्रश्न


3- अभिव्यक्ति और माध्यमन  1 अंक x 5 प्रश्न


4- आरोह भाग - 2 गद्य        1 अंक x 5 प्रश्न


5- आरोह भाग - 2 काव्य      1 अंक x 5 प्रश्न


6- वितान भाग - 2              1 अंक x 10 प्रश्न



खंड - ब

(वर्णनात्मक प्रश्न) 

अंक - 40


1- नए अप्रत्याशित विषय पर 150 शब्दों में लेखन। 5 अंक

(तीन वैकल्पिक विषय में से किसी एक पर लिखना है)


2- औपचारिक पत्र-लेखन (विकल्प सहित)  5 अंक


3- कविता/ कहानी/ नाटक की रचना-प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न

दो लघु उत्तरीय प्रश्न (3 x 1, 2 x 1) = 5 अंक


4- समाचार लेखन (उल्टा पिरामिड शैली/ फीचर लेखन/ आलेख लेखन)

दो लघु उत्तरीय प्रश्न (3 x 1, 2 x 1) = 5 अंक


5- आरोह काव्य खंड

क) तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर (50-60 शब्दों में  3 x 2 = 6)

ख) तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर (30-40 शब्दों में  2 x 2 = 4)


6- आरोह गद्य खंड

क) तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर (50-60 शब्दों में 3 x 2 = 6)

ख) तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर (30-40 शब्दों में 2 x 2 = 4)



आंतरिक मूल्यांकन

20 अंक


1- श्रवण (सुनना) कौशल की जांच -         5 अंक


2- वाचन (बोलना) कौशल की जांच -        5 अंक


3- परियोजना कार्य -                           10 अंक


क) विषय वस्तु              - 5 अंक

ख) भाषा एवं प्रस्तुति      - 3 अंक

ख) शोध एवं मौलिकता।  - 2 अंक


* निम्नलिखित पाठ सत्र 2020-21 के लिए पाठ्यक्रम से हटा दिए गए हैं-



कक्षा ग्यारहवीं के लिए यहां देखें-

तुलसीदास (कवितावली एवं रामचरितमानस) कक्षा- 12वीं

  तुलसीदास: अध्ययन मार्गदर्शिका लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तरी तुलसीदास ने शास्त्रीय और लोकभाषा के बीच संतुलन कैसे साधा? उनकी रचनाओं में यह द्वंद्...